गेहूँ
की संकरी एवं चौड़ी पत्ती के खरपतवार का एक साथ नियन्त्रण करने के हेतु
सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत + मैट्सल्फ्यूरॉन 5 प्रतिशत की 40 ग्राम
मात्रा को 30 दिन पुरानी फसल पर, 600 लीटर
पानी में घोल कर छिड़कें. ध्यान रहे घोल छिड़कते समय खेत में नमी होना आवश्यक है.
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Thursday, February 11, 2016
Saturday, January 10, 2015
जनवरी माह के प्रमुख कार्य
- गेहूँ में देर से बुबाई हेतु उपयुक्त प्रजाति एच.डी -.6528 एवं लोक-1 की बुवाई के दौरान प्रति एकड़ 2 किलोग्राम बीज दर बढ़ा दें. इस्की बुवाई 15-20 जनवरी तक जहाँ पानी उपलब्ध है, की जा सकती है.
- दिसम्बर में बोई गई गेहूँ की फसल में पहला पानी बुवाई के 20-25 दिन बाद दें. प्रति एकड़ 20-25 किलो ग्राम यूरिया का भुरकाव सिंचाई के दूसरे दिन करें.
- चने की फसल में इल्ली के नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस कीटनाशक का प्रयोग 20 ई.सी. दवा, 2 मिली-लीटर प्रति लीटर लानी में मिलाकर छिड़कें. आवश्यकता के अनुसार 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें.
- अरहर को पाले से बचाने हेतु अरहर के खेत में एक सिंचाई करके खेत के आस-पास धुँआ करें.
- नवम्बर के माह में बोई गई गेहूँ की फसल में सिंचाई गाँठ बनते समय करें.
- अलसी में फली-छेदक कीट के नियंत्रण हेतु 1 मिली-लीटर इन्डोसल्फान दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.
- देर से बोई गई गेहूँ की फसल में संकरी पत्ती के नींदा के नियंत्रण हेतु बोनी के 20-25 दिन बाद 2 ग्राम आईसोप्रोट्युरॉन दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें जबकि चौड़ी पत्ती के नींदा अधिक होने पर 2-4 डी दवा 1.5 मिली-लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर बोनी के 30-25 दिन बाद छिड़कें.
- गेहूँ के खेत में पानी जमा न होने दें अन्यथा फसल पीली पड़ सकती है. इस प्रकार पीली पड़ी फसल से पानी निकालकर 20 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ डालें.
- गेहूँ की फसल में कल्ले बनने की अवस्था में नत्रजन ऊर्वरक दें.
- पाले से रक्षा के लिये बागों की सिंचाई करें एवं नये पौधों को घास से ढकें.खेत के आस-पास धुँआ करें.
- आम के फलों को गिरने से रोकने के लिये एन.ए.ए. (नैप्थिलीन ऐसिटिक ऐसिड / प्लेनोफिक्स) का छिड़काव 2 मिली-लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर करें.
- युकिलिप्टिस की नर्सरी तैयार करने के लिये बीजों की बुवाई जनवरी के अंतिम सप्ताह से फरवरी प्रथम सप्ताह तक करें.
- जहाँ सिंचाई की सुविधा हो वहाँ आम, अमरूद, आँवला इत्यादि फलदार पौधों को जनवरी-फरवरी में लगायें.
- पपीते को पाले से बचाने के लिये दक्षिण और पश्चिम दिशा की तरफ धुँआ तथा पौधों की सिंचाई करें.
- जनवरी में नींबू की टहनी से कलमी पौधे तैयार करने के लिये पैंसिल की मोटाई की 12 सैंटी-मीटर लम्बी टहनी काटें. इस टहनी को 12 सैंटी-मीटर ज़मीन में गाड़ दें तथा 3 सैंटी-मीटर भाग ज़मीन के ऊपर रखें. पन्द्रह से बीस दिनों में इसमें अंकुरण होने लगेगा. इस समय इसकी तुरंत सिंचाई करें. इस प्रकार जुलाई में लगाने लायक पौधे तैयार हो जायेंगे.
- रबी फसलों में आवश्यकतानुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें.
- टमाटर में सिंचाई के साथ नत्रजन ऊर्वरक दें.
- गेहूँ के आटे को बिना छाने रोटी बनायें.
- नौ भाग गेहूँ में एक भाग भुना हुआ सोयाबीन मिलाकर पिसवायें. आटे से रोटी, पूड़ी, हलुआ एवं लड़्डू इत्यादि बनाकर खायें.
- आहार में तिल एवं गुड़ शामिल करें.
- स्थानीय तौर पर उपलब्ध तथा मौसमी एवं हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ को खाने में अधिकाधिक शामिल करें.
- स्थानीय तौर पर उपलब्ध तथा मौसमी फल जैसे अमरूद, आँवला, बेर, पपीता, इत्यादि का अधिकाधिक सेवन करें.
- तेवड़ा (बटरा) का सेवन किसी भी खाद्य पदार्थ के रूप में न करें.
- दूध एवं दुग्ध उत्पाद जैसे घी, खोवा, पनीर, खीर एवं रबड़ी इत्यादि को भोजन में शामिल करें. किंतु ठंड के मौसम में दही, छाछ एवं लस्सी जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें.
- मौसमी सब्ज़ियों को गर्म पानी में पाँच मिनट रख कर धूप में सुखाकर पैक कर रखें. जब सब्ज़ी महँगी हो जायें तब इनका सेवन करें. इसी प्रकार सस्ती सब्ज़ियों का अचार बनाकर रखें. टमाटर से सॉस तथा केचप एवं अमरूद से जैली बनायें. आँवले में काला नमक और अजवाईन मिलाकर सुपारी, किसा तथा पूरे आँवले का शक्कर मे साथ मुरब्बा, रस तथा अचार बनाकर तथा पैक कर सुरक्षित रखें. गर्मी के मौसम में इनका सेवन करें. इस विषय पर अधिक जानकारी अथवा प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिये आपके ज़िले में स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क करें.
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Tuesday, December 13, 2011
गेहूँ में संकरी पत्ती का नींदा नियंत्रण
गेहूँ में संकरी पत्ती के नींदा नियंत्रण हेतु 13 ग्राम सल्फोसल्फ्यूरॉन दवा 200 लीटर पानी में मिलाकर बोनी के 30 दिन बाद छिड़कें.ध्यान रहे दवा के छिड़्काव के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिये.
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